वित्र की नमाज़ kaise padhe
Witr ki namaaz
वित्र की नमाज़ हमेशा इशा के नमाज़ के वक़्त पड़ते है लेकिन वित्र की नमाज़ आप इशा के वक़्त से लेकर फजिर की अज़ान तक रहता है।आप इस बीच में कभी भी पढ़ सकते है । वित्र की नमाज़ 3 रेकात होती है।ये फ़र्ज़ नमाज़ नहीं है पर हमारे पैगम्बर इसे हमेशा अदा करते थे इसी लिए witr नमाज़ छोड़ना नहीं चाहिए अगर कभी गलती से छुट जाए तो कजा अदा कर लेना चाहिए। वित्र की नमाज़ को कई लोग वाजिब करार देते है प्र वितर वाजिब नहीं सुन्नत है।witr की नमाज़ 1 रेकत से शुरू हो जाती है जैसे 1,3,5,7।
वित्र की तीनो रकअत में करायत फ़र्ज़ है और हर रकअत में अलहम्दो के बाद सूरत मिलाना वाजिब है।
वित्र की तीनो रकअत में करायत फ़र्ज़ है और हर रकअत में अलहम्दो के बाद सूरत मिलाना वाजिब है।
बेहतर ये है के पहली रकअत में सब हस्म रबेक अला या इन्ना अन्जलना पढ़े और दूसरी रक्अत में कुल्या अह्युल काफेरून और तीसरी रकात में कुल होवल लाहो अहद पढ़े और कभी कभी और सूरते भी पढ़े.
वित्र की नमाज़ का तरीक़ा
वित्र की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा बाकी सब नमाजो की तरह ही है। वित्र की नमाज़ पढ़ने के लिए आप 2 रकात नमाज़ पड़ कर बैठ जाए फिर आत्तहियातो पढ़कर खरा हो जाए और सुरह फातिहा और उसके साथ कोई और सुरः पड़ के अल्लाहु अकबर कहा के कंधे तक हाथ उठा कर फिर से हाथ बांध ले और दुआए कुनुत पढ़ ले और रुकुह सजदा करके नमाज़ पूरी कर ले।
अगर दुआए कुनूत याद ना हो तो ये दुआ पढ़े
अगर बाकी सब भी याद ना हो तो
Allahummag firli तीन बार कह ले














